उत्तम आचरण, उत्तम गुण, ह्रदय के उत्तम भाव, इश्वर की भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, सदाचार और धर्मं का पालन करना- अमृत पान के सामान है और यह अमृत मिलता है सत्संग के माध्यम से।
मोती ग्यान के जीतने के लिये प्रेम जीतो ! पीने के लिये क्रोध पीयो ! खाने के लिये गम खाओ ! देने के लिये दान दो ! लेने के लिये ग्यान लो ! कहने के लिये सत्य कहो ! रखने के लिये इज्जत रखो ! फेंकने के लिये ईर्ष्या फेंको ! छोडने के लिये मोह छोडो ! दिखाने के लिये दया दिखाओ ! श्रद्धा स्मारिका २००८ थाने मण्डल